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किसान कृषि बिल (Agriculture Farm Bill 2020)

05:16 AM, 06-Mar-2021

 
किसान कृषि बिल  
मोदी सरकार किसानों की आय को बढ़ाने के लिए, अनेक प्रकार की योजनाओं और सेवाओं को शुरू कर रही है। जिसके माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधर हो सके। और किसानों की आय को बढ़ाया जा सके। जिसके लिए मोदी सस्कार द्वारा एक नया किसान बिल लाया गया। जो किसानों की फसल, बाजार, फसल मूल्य तथा बाजार मूल्य आदि से जुड़ा हुआ था। Farmers Bill को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 14 सितंबर, 2020 को लोकसभा में प्रस्तुत किया था। जिसे 5 जून, 2020 को अध्यादेश के रूप में विधेयक रखा गया था। इस बिल का मुख्य उद्देश्य कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य को सरलीकरण करना।जो लोकसभा में 17 सितंबर 2020 को पारित किया गया। था जबकि राज्य सभा ने आज इस विधेयक को पारित कर दिया।

नया किसान बिल का क्यों हो रहा है विरोध ?

किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून के कर कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा जिसका नुकसान किसानों को होगा। क्योंकि सरकार अकाल, युद्ध, प्राकृतिक आपदा जैसी अन्य समय पर ही न्यूनतम मूल्य निर्धारित करेगी जैसे – कोरोना काल में सैनिटाइजर – मास्क पर लगाया था।

  • कृषि उत्पाद की जमाखोरी के कारण वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी।
  • मंडी में किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित होता है। जबकि नये कानून में यह स्पष्ट नहीं है। किसान को फसल का न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। क्यों उत्पादन अधिक होने से कीमत घट सकती है।
  • APMC में किसानों को फसल के मूल्य में किसी प्रकार का धोखा धड़ी होने का डर नहीं रहता है। जबकि नए बिल अनुसार पैन कार्ड वाला कोई भी व्यापारी फसल खरीद सकता है।

कृषि से जुड़े तीन बिल, जो अब बन गए हैं कानून

3 कृषि कानून 2020 जिनका विरोध किया जा रहा है। जिसकी जानकारी निम्न प्रकार है –
First sale
केंद्र सरकार ने किसानों को देश में कहीं भी फसल बेचने को आजाद किया है। ताकि राज्यों के बीच कारोबार बढ़ेगा। जिससे मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च कम होगा।
Second bill
इस बिल में सरकार ने किसानों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया गया है. यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करता है. कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है.
Third bill
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को जरूरी चीजो की लिस्ट से हटाने का प्रावधान रखा गया है। जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिले।

इस बिल के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने कहा कि, भारतीय जनता पार्टिय के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने किसानों के हित के लिए अनेक प्रकार की योजनाओं तथा सेवाओं का शुभारम्भ किया है। जिससे किसानों को उनके उत्पाद की गई फसल की, अच्छी कीमत मिल सके। और किसानों की आर्थिक स्तर, सामजिक स्तर तथा जीवन स्तर उठ सके। इस प्रक्रिया के लिए भारत सरकार पिछले 6 सालों से अनेक प्रकार की योजनओं को शुरू कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि अनाजों की ख़रीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जारी रहेगी।  इस बिल पर प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि, एमएसपी की दरों में 2014-2020 के बीच बढ़ोत्तरी की गई है। जो इस समय रबी सीजन के लिए एमएसपी की घोषणा आगामी सप्ताह में की जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों में किसानों की सम्पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

नया किसान बिल के मुख्य प्रावधान

  • नया किसान बिल में किसानों को फसल बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। अब कोई भी किसान अपनी फसल को मंडी के बहार भी व्यापारी के पास बेच सकता है।
  • किसान अपने फसल को देश के किसी भी हिस्से में कहीं भी बेच सकता है।
  • किसानों को किसी भी प्रकार का कोई भी उपकर नहीं देना होगा। साथ ही बिल के अनुसार अब माल ढुलाई का खर्च भी देना होगा।
  • नये किसान कृषि विधेयक के अनुसार किसानों को ई-ट्रेडिंग मंच प्रदान किया जायेगा। जिससे माध्यम से इलेक्ट्रोनिक निर्बाध व्यापार सुनिश्चित किया जा सके।
  • kisan Krishi Bill के तहत मंडियों के अतिरिक्त व्यापार क्षेत्र में फॉर्मगेट, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण यूनिटों पर भी व्यापार की स्वतंत्रता होगी।
  • इस बिल के माध्यम से किसान और व्यापारी सीधे एक दूसरे जुड़ सकेंगे जिससे बिचौलियों का लाभ समाप्त होगा।

शंकाएँ

  • सरकार द्वारा निर्धारत किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज की ख़रीद बंद हो जाएगा।
  • किसान फसल को मंडी से बहार बेचता है। तो एपीएमसी मंडियां समाप्त हो जाएंगी
  • ई-नाम जैसे सरकारी ई-ट्रेडिंग पोर्टल का क्या होगा?

समाधान

  • MSP पर पहले की तरह फसल की खरीद जारी रहेगी। किसान अपनी उपज एमएसपी पर बेच सकेंगे। आगामी रबी
  • सीजन के लिए एमएसपी अगले सप्ताह घोषित की जाएगी।
  • किसान को अनाज मंडी के अलावा दूसरा ऑप्शन भी मिलेगा।
  • सरकार द्वारा शुरू की गयी ई-नाम ट्रेडिंग व्यवस्था भी जारी रहेगी।
  • इलेक्ट्रानिक मंचों पर कृषि उत्पादों का व्यापार बढ़ेगा। इससे पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी।

कृषि बिल क्या है और किसान की क्या मांग है ?

 

लेख   कृषि किसान बिल (कृषि विधेयक 2020 PDF)
 भाषा   हिंदी
 लाभार्थी   किसान
 उद्देश्य   फसल बेचने के लिए अन्य बाजार प्रदान करना

किसान बिल पर बैठक का नतीजा ?

किसान संगठन और केंद्र सरकार के बीच मंत्री मंडल के बीच 9-10-2020 को किसान कृषि बिल को लेखर अहम बैठक है। जिसमें सरकार कानून में संशोधन करने को लेकर किसानों से राय मांगेगी और बीच का रास्ता निकालने की बात रखेगी। सरकार का कहना है की नया कृषि कानून किसानों की आय को बढ़ाने के लिए बनाया गया है। न कि किसानों के ऊपर किसी प्रकार की दबाव बनाने के लिए बनाया गया है। 6 वीं दौर की बैठक में यह देखना खाद रहेगा। कि सरकार किसान बिल को वापस लेने के लिए तैयार होती है ? या कृषि बिल में कोई नया संशोधन किया जाता है ?

कृषि विधेयक के संबंध में लोग अनेक प्रकार की बातें फैला रहे हैं। जबकि कृषि विधेयक में किसान अब अपनी फसल कहीं भी बेचने को स्वतंत्र है। नये कृषि विधेयक के अनुसार सरकार MSP को जारी रखेगी। और किसानों को फसल मंडी के अलवा दूसरा ऑप्शन भी फसल बेचने के लिए प्रदान करेगी।

2021-22 रबी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य लिस्ट –
हम आपको रबी फसल 2020-21 न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्दिष्ट करने वाली पूरी तालिका प्रदान कर रहे हैं।

फसल – गेहूँ
RMS 2020-21 के लिए MSP – 1925 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 1975 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 960 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 50 रुपये
लागत से अधिक (%) – 106

फसल – जौ
RMS 2020-21 के लिए MSP – 1525 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 1600 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 971per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 75 रुपये
लागत से अधिक (%) – 65

फसल – चना दाल
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4875 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5100 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2866 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 225 रुपये
लागत से अधिक (%) – 78

फसल – मसूर दाल
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4800 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5100 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2864 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 300 रुपये
लागत से अधिक (%) – 78

फसल – सरसों
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4425 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 4650 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2415 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 225 रुपये
लागत से अधिक (%) – 93

फसल – कुसुम खेती
RMS 2020-21 के लिए MSP – 5215 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5327 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 3551 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 112 रुपये
लागत से अधिक (%) – 50

 

किसान बिल से जुड़ी अफवाह तथा सच्चाई –
  • न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का क्‍या होगा?
    झूठ: किसान बिल असल में किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य न देने की साजिश है।
    सच: किसान बिल का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से कोई लेना-देना नहीं है। एमएसपी दिया जा रहा है और भविष्‍य में दिया जाता रहेगा।
  • मंडियों का क्‍या होगा?
    झूठ: अब मंडियां खत्‍म हो जाएंगी।
    सच: मंडी सिस्‍टम जैसा है, वैसा ही रहेगा।
  • किसान विरोधी है बिल?
    झूठ: किसानों के खिलाफ है किसान बिल।
    सच: किसान बिल से किसानों को आजादी मिलती है। अब किसान अपनी फसल किसी को भी, कहीं भी बेच सकते हैं। इससे ‘वन नेशन वन मार्केट’ स्‍थापित होगा। बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके किसान ज्‍यादा मुनाफा कमा सकेंगे।
  • बड़ी कंपनियां शोषण करेंगी?
    झूठ: कॉन्‍ट्रैक्‍ट के नाम पर बड़ी कंपनियां किसानों का शोषण करेंगी।
    सच: समझौते से किसानों को पहले से तय दाम मिलेंगे लेकिन किसान को उसके हितों के खिलाफ नहीं बांधा जा सकता है। किसान उस समझौते से कभी भी हटने के लिए स्‍वतंत्र होगा, इसलिए लिए उससे कोई पेनाल्‍टी नहीं ली जाएगी।
  • छिन जाएगी किसानों की जमीन?
    झूठ: किसानों की जमीन पूंजीपतियों को दी जाएगी।
    सच: बिल में साफ कहा गया है कि किसानों की जमीन की बिक्री, लीज और गिरवी रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। समझौता फसलों का होगा, जमीन का नहीं।
  • किसानों को नुकसान है?
    झूठ: किसान बिल से बड़े कॉर्पोरेट को फायदा है, किसानों को नुकसान है।
    सच: कई राज्‍यों में बड़े कॉर्पोरेशंस के साथ मिलकर किसान गन्‍ना, चाय और कॉफी जैसी फसल उगा रहे हैं। अब छोटे किसानों को ज्‍यादा फायदा मिलेगा और उन्‍हें तकनीक और पक्‍के मुनाफे का भरोसा मिलेगा।

 

 


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